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मकर संक्रांति (Makar Sankranti 2022) का त्यौहार क्यों मनाया जाता है

सुन्दर कर्म और शुभ पर्व हर पल सुख हर दिन शांति आप सब के लिए लाये मकर संक्रांति

मकर संक्रांति का पर्व साल भर में आने वाले सभी प्रमुख व्रत त्यौहारों में से एक है। मकर शब्द का अर्थ मकर राशि से और संक्रांति का प्रवेश करने से है, मकर संक्रांति के दिन सूर्य उत्तरायण होता है। जबकि उत्तरी गोलार्ध सूर्य की ओर मुड़ जाता है। ज्योतिष के अनुसार सूर्य इस दिन धनु राशि से मकर राशि में प्रवेश करते है जिस कारण इसे मकर संक्रांति कहा जाता है। 

कुछ जगहों पर इसे उत्तरायण के नाम से भी जाना जाता है। आज हम आपको साल 2022 में मकर संक्रांति पर्व किस दिन मनाया जायेगा, मकर संक्रांति कब मनाई जाती है, पूजा का मुहूर्त, पूजा विधि, महापुण्य काल शुभमुहूर्त और इसके महत्त्व के बारे में बताएँगे

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मकर संक्रांति ( Makar Sankranti 2021 ) का त्यौहार क्यों मनाया जाता है
मकर संक्रांति 

मकर संक्रांति क्यों मनाया जाता है (makar sankranti kyu manaya jata hai)

मकर संक्रांति का त्यौहार सूर्य के राशि परिवर्तन के उपलक्ष्य में मनाया जाता है, इस दिन सूर्य का धनु राशि से मकर राशि में संक्रमण होता है, इसलिए इस दिन को मकर संक्रांति कहा जाता है। सूर्य इस जिव जगत की आत्मा है हम सबके जीवन का आधार है इस दिन से ही सूर्य पूर्व से उत्तर दिशा की और उदित होते है इसलिए इस दिन को उत्तरायण के नाम से भी मनाया जाता है, गुजरात, राजस्थान इन शहरों में उत्तरायण की धूम होती है पंजाब, हरियाणा में माघी पर्व के नाम से इस त्यौहार को मनाया जाता है। 

साथ ही साथ मुंबई में इसे तिलकूट के नाम से मनाते है असम में इस त्यौहार को बिहु कहते है और दक्षिण भारत में पोंगल कहते है, पूरा भारत में इस त्यौहार को इन सब अलग-अलग नामों से मनाया जाता है और भगवान सूर्य से प्रार्थना करता है की हम सब के जीवन में प्रकाश दे उजाला दे

जब सूर्य उत्तरायण में होता है तब यह देवताओं का दिन होता है और जब सूर्य दाक्षिरायण में होता है तब यह देवताओं की रात होती है यानि मकर संक्रांति से लेकर कर्क संक्रांति तक देवताओं का दिन है इस बीच ऐसा कहते है आस-पास के वातावरण में रज और सतगुण का वास होता है इसलिए इस दिन से सभी शुभ कार्य भी शुरू हो जाते है विवाह अच्छे-अच्छे, नए-नए कार्य गृह प्रवेश कोई भी सामान लेना हो यह सभी कार्य इस दिन से शुरू हो जाते है

Makar Sankranti | makar sankranti 2020 | मकर संक्रांति

साथ ही साथ गुरु तारिका उदय भी हो गया है यदि आप व्रत उपवास शुरू करना चाहते है तो माघ मासे शुक्ल पक्षे किसी भी व्रत उपवास को शुरू कर सकते है। 14 जनवरी 2022 को मकर संक्रांति का त्यौहार मनाना है इस दिन गुरुवार का दिन है इस दिन माघ मास कृष्ण पक्ष की पंचमी तिथि है, उत्तरा फ़ागुनी नक्षत्र है यह दिन भुतही खास है क्यूंकि आज से सूर्य मकर राशि में बुद्ध के साथ रहने वाले है इसके कारण बुद्ध आदित्य नाम का योग बनने वाला है, जो आपके जीवन में सफलता का सूचक होगा साथ ही साथ उत्तरा फ़ागुनी नक्षत्र के कारण भी वर्धमान नाम का योग यहा पर उपस्थित हो रहा है जिससे आप अपने करे हुए कार्यों में सफलता को प्राप्त करेंगे

मकर संक्रांति 2022 तिथि व शुभ मुहूर्त (Makar Sankranti Date 2022)

  • साल 2022 में मकर संक्रांति का पर्व - 14 जनवरी शुक्रवार के दिन मनाया जायेगा
  • उत्त्तरायण संक्रांति का क्षण रहेगा - 14 जनवरी शुक्रवार दोपहर 2 बजकर 43 मिनट पर। 
  • संक्रांति पुण्यकाल मुहूर्त होगा14 जनवरी शुक्रवार दोपहर 2 बजकर 43 मिनट से शाम 5 बजकर 45 मिनट तक। 
  • मुहूर्त की कुल अवधि - 09 घंटा 16 मिनट का होगा
  • संक्रांति महापुण्य काल शुभ मुहूर्त होगा - 14 जनवरी शुक्रवार दोपहर 2 बजकर 43 मिनट से शाम 4 बजकर 28 मिनट तक। 
  • मुहूर्त की कुल अवधि - 2 घंटे 15 मिनट का होगा

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मकर संक्रांति कब मनाई जाती है (makar sankranti kab manaya jata hai)

सूर्य के राशि परिवर्तन को संक्रांति कहते है। ज्योतिष अनुसार सूर्य के धनु राशि से मकर राशि पर जाना ही मकर संक्रांति कहलाता है। इस समय सूर्य दाक्षिरायण से उत्तरायण हो जाता है। मकर संक्रांति का पर्व साल भर में आने वाले सभी प्रमुख व्रत त्यौहारों में से एक है। मकर शब्द का अर्थ मकर राशि से और संक्रांति का अर्थ प्रवेश करने से है। कुछ जगहों पर मकर संक्रांति को उत्तरायण के नाम से जाना जाता है। साल 2022 में मकर संक्रांति का पर्व 14 जावरी दिन शुक्रवार को मनाया जायेगा। 

मकर संक्रांति पूजा विधि (Makar Sankranti Puja Vidhi)

पहली पूजा विधि 

शास्त्रों में मकर संक्रांति के दिन गंगा स्नान का बहुत महत्त्व बताया गया है इसलिए यदि संभव हो तो इस दिन प्रातःकाल उठकर किसी नदी, तालाब या शुद्ध जलाशय में स्नान करें नहीं तो सूर्योदय से पहले उठकर तिल मिले पानी से स्नान करें। इसके बाद सूर्य देव की आराधना कर उन्हें जल का अर्घ्य देकर ॐ सूर्याय नमः मंत्र का जाप करें

प्राचीन मान्यताओं के अनुसार इस दिन तीर्थो में गंगा स्नान और दान करने से पुण्य फल प्राप्त होता है। स्नान आदि के बाद ब्राह्मणो व गरीबो को दान करना भी बहुत शुभ होता है, विशेष रूप से इस दिन दान में आटा, दाल, चावल, खिचड़ी और तिल से बने लड्डू दिए जाते है। अंत से सभी में तिल व गुड़ प्रसाद वितरण करना चाहिए

दूसरी पूजा विधि 

मकर संक्रांति के दिन हो सके तो सुबह सूर्य उदय से पहले जागने की कोशिश करे ऐसा नहीं कर सकते तो जब भी आप जगे जल्दी से जल्दी आप नहाने की कोशिश करे क्युकी मकर संक्रांति के दिन के स्नान का विशेष महत्त्व होता है और इस दिन स्नान से पहले हो सके तो तिल के तेल की मालिस करना चाहिए तिल का तेल ना मिले तो आप यदि तिल मिलते है तो उनसे अपने ऊपर उपटन करिए यह सभी चीजे सौभाग्य वर्धक होती है

यदि आप कर सकते है तो अवश्य करिये और उसके बाद नहाने के पानी में रक्त चन्दन और बेल के पत्ते डालकर स्नान करना चाहिए, सूर्य देवता के पूजन में यह सभी चीजे बहुत ही महत्पूर्ण होती है तो इस तरह से स्नान करिये सभी तीर्थो का नाम लीजिए यदि आप घर में स्नान कर रहे है वैसे तो इस दिन से प्रयागराज में मेला शुरू होता है जहाँ स्नान करने का विशेष महत्त्व होता है साथ ही साथ गंगा सागर में भी मेला लगता है, वहा पर भी स्नान दान-पूण्य का महुत महत्त्व होता है। 

यदि हो सके तो गायत्री मंत्र का जाप करिये गायत्री मन्त्र के जाप से सूर्य भगवान प्रसन्न होते है
ॐ भूर्भुवः स्व: तत्सवितुर्वरेण्यं भर्गो देवस्य धीमहि धियो यो नः प्रचोदयात् ॥
 इस दिन तिल का दान करे, गुड़ का, गजक का और शुद्ध देसी घी यम आपके जीवन में मोक्ष पद की प्राप्ति कराता है इसका दान जरुर करिए और कच्चे दाल चावल की खिचड़ी इसमें चावलके साथ आप उड़द की दाल या मूंग की दाल दाल ले सकते है सेंधा नमक और साथ ही साथ सफेद कपड़ा यदि आप पूरा ना ले पाएं तो एक सफ़ेद रंग का रुमाल लेलीजिये कम्बल इत्यादि इन सभी चीजों का दान देना चाहिए सफेद वस्त्र का और इन सभी चीजों का दान देने से आपका सूर्य आपको उत्तम परिणाम देता है और जीवन में आने वाली सभी विघ्न बाधाओं का नाश करता है

Makar Sankranti | makar sankranti 2020 | मकर संक्रांति

हम सभी के घर में एक सूर्य होता है जो हमारे पिता के रूप में उपस्थित होते है तो इस दिन पर उनका भी पूजन, अर्चन, वन्दन भी अवश्य किया जाना चाहिए, आप अपने पिता जी को इस दिन अपने हाथ से टिल, गुड अवस्य खाने को दीजिए और उनके पैर छूकर आशीर्वाद लीजिए और साथ ही साथ अपने पिजा जी को पानी जरुर दीजियेगा ऐसा करने से आपकी नौकरी में आने वाली बाधाएं विघ्न बाधाएं सभी का नाश होता है, मान सम्मान की प्राप्ति होती है, अच्छे स्वास्थ की प्राप्ति होती है, आपकी बुद्धि जागृत होती है और जीवन में आने वाली हर विघ्न बाधा से आपको मुक्ति मिलती हैअपने घर के सूरज यानि अपने पिता को वंदन, चरण स्पर्श भी जरूर करिएगा

मकर संक्रांति का महत्त्व 

धार्मिक और सांस्कृतिक दोनों ही दृष्टिकोण से अगर देखे तो मकर संक्रांति पर्व का खास महत्त्व है। प्राचीन कथाओं के अनुसार इस दिन सूर्य भगवान अपने पुत्र शनि के घर जाते है। शनि, मकर व कुम्भ राशि के स्वामी है। जिस कारण यह पर्व पिता-पुत्र के इस अनोखे मिलान का प्रतिक है

कुछ जगहों पर तो कोई नई फसल और नई ऋतु आगमन के तौर पर भी मकर संक्रांति धूम-धाम से मनाया जाता है। इस पर्व के दौरान तिल और गुड़ से बने लड्डू व अन्य मीठे पकवान बनाने की परम्परा है। मान्यता है की इस समय ठण्ड का मौसम होता है इसलिए इस दौरान तिल व गुड़ से बने लड्डू बनाये जाते है जो स्वास्थ के दृष्टि से लाभदायक होते है

मकर संक्रांति पर खिचड़ी का महत्त्व 

मकर संक्रांति के दिन विशेष रूप से खिचड़ी बनाने, खाने और खिचड़ी का दान करना शुभ माना जाता है इसलिए बहुत सी जगहों पर इस पर्व को खिचड़ी के नाम से भी जाना जाता है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार चावल को चन्द्रमा का प्रतिक और काली उड़द की दाल को शनि का प्रतिक माना जाता है, कहा जाता है की मकर संक्रांति पर खिचड़ी खाने और दान करने से कुंडली में ग्रहों की स्थिति मजबूत होता है। इसी कारण इस दिन खिचड़ी खाने और दान करने का बहुत अधिक महत्त्व है

मकर संक्रांति योग और इसका किस राशि पर क्या प्रभाव होगा 

शास्त्रों में मकर संक्रांति का विशेष महत्त्व है। वैसे तो हमेशा ही मकर संक्रांति पर्व को लेकर असमंजस की स्थिति बना रहता है लेकिन पंचांग के अनुसार 2022 पौष शुक्ल प्रतिपदा गुरुवार यानि 14 जनवरी के दिन मकर संक्रांति का पर्व मनाया जायेगा। ज्योतिष अनुसार इस बार मकर संक्रांति के दिन करीब 59 सालों के बाद पंचग्रही योग बनेगा जिस कारण इस पर्व का महत्त्व कहीं गुना अधिक बढ़ जायेगा इसके अलावा यह योग कुछ राशियों के जातको के लिए बेहद शुभ रहेगा। तो आइये जानते है कौन से राशियों के लिए ये योग बेहद खास होने जा रहा है..... 

मेष राशि पर पंचग्रही योग का प्रभाव 

14 जनवरी के दिन सूर्य के मकर राशि में जाने और इस दिन बन रहे पंचग्रही योग के प्रभाव से मेष राशि के जातको के लिए समय काफी अच्छा रहेगा। सूर्य का ये राशि परिवर्तन आपकी नौकरी व्यवसाय में शुभ योग लेकर आ रहा है आपको धनलाभ होने के साथ ही परिवारिक सुख का प्राप्त होगा

वृषभ राशि पर पंचग्रही योग का प्रभाव 

मकर संक्रांति  बनने वाला शुभ योग वृषभ राशि के जातको के लिए बेहद लाभकारी रहेगा। आपको भाग्योदय का संभावना बनेगा। आकस्मिक धन लाभ और घर-परिवार में मांगलिक कार्यक्रम होने का संभावना है, शिक्षा के क्षेत्र में भी आपको सफलता मिलेगा

कर्क राशि पर पंचग्रही योग प्रभाव 

कर्क राशि के जातको के लिए ये राशि परिवर्तन दांपत्य जीवन के लिए बहुत ही शुभ फल लेकर आएगा।आपके व्यापर-व्यवसाय में वृद्धि का सम्भवना बढ़ेगा।समाज में प्रतिष्ठा बढ़ेगा और आपका आर्थिक पक्ष काफी मजबूत होगा। 

कन्या राशि पर पंचग्रही योग का प्रभाव 

मकर संक्रांति पर होने जा रहे इस शुभ योग के चलते कन्या राशि के जातको को कार्य व्यवसाय में तरक्की की सम्भावना बनेगा, कार्य के सिलसिले में यात्राओं से धन अर्जित करने में आप सफल रहेंगे। आय के स्रोत प्राप्त होने के सम्भवना है

वृश्चिक राशि पर पंचग्रही योग का प्रभाव 

सूर्य का यह राशि परिवर्तन वृश्चिक  के लिए सुख सौभाग्य में वृद्धि करने वाला होगा, आपको पैतृक सम्पति का लाभ मिल सकता है, भूमि, भवन खरीदने के शुभ योग है।स्वास्थ्य लाभ और कोई बड़ा शुभ समाचार प्राप्त होने का सम्भवना है

धनु राशि पर पंचग्रही योग का प्रभाव 

साल 2022 में सूर्य का मकर राशि में गोचर करना आपके लिए सुख-समृद्धिदायक रहेगा, घर-परिवार में प्रसन्नता का वातावरण होगा। आर्थिक स्थिति मजबूत रहने के योग है, बिजनेस में लाभ और आय के नए स्रोत मिलने का प्रबल सम्भवना है

मीन राशि पर पंचग्रही योग का प्रभाव 

14 जनवरी पर करीब 59 सैलून बाद पंचग्रही योग के चलते मीन राशि बहुत फायदे में रहेगा। आपको आय के नए स्रोत प्राप्त होंगे जिससे आपके आय में वृद्धि होगा। परिवारिक जीवन सुखमय रहेगा, किसी चल-अचल सम्पति के प्राप्ति के योग है

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