क्या आप जानते है विश्व गौरैया दिवस (World Sparrow Day) कब है?

गौरैया एक पक्षी है जिसके बारे में आप अच्छे से जानते होंगे। ये पक्षी नार्मली हमारे घर की छतों पर, पेड़ों पर बहुत आसानी से देखा जा सकता था। आज स्थिति ये है कि ये जल्दी दिखाई नहीं देती है क्यों किसी कारण संकट ग्रस्त जाती में शामिल कर दिया गया है। शायद इसी जागरूकता के तहत विश्व गौरैया दिवस मनाया जाता है। गौरैया के कई फायदे भी है इसीलिए गौरैया विलुप्त हो रही है और उसको बचाना है इसी जागरूकता के तहत गौरैया दिवस मनाया जाता है। 

क्या आप जानते है विश्व गौरैया दिवस (World Sparrow Day) कब है?
विश्व गौरैया दिवस 

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विश्व गौरैया दिवस कब मनाया जाता है?  

विश्व गौरैया दिवस World Sparrow Day प्रत्येक वर्ष 20 मार्च को पुरे देश भर में मनाया जाता है। इस पक्षी के बारे में जागरूकता बढ़ाने और इसके संरक्षण या बचाव के लिए विश्व गौरैया दिवस मनाया जाता है। गौरैया भारत में पाया जाने वाला एक सामान्य सा पक्षी है लेकिन इसे शहरी और नगरीय क्षेत्रों में  ख़त्म होने के कगार पर पहुंचा दिया गया है। आज इनकी संख्या बिलकुल ना के बराबर हो गई है। ना ही ये छतों पर दिख रही है ना ही पेड़ों पर ही थोड़े बहुत जंगल में बच्चे भी है तो जंगल में भी इनको जो बड़े पक्षी है उनसे भी खरता होता है। इनकी स्थिति इस समय काफी संकटमय हो गई है। 

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एक-दो दशक पहले हमारे आंगनों में फुदकने वाली गौरैया आज के इस दौर में  बिलुप्ति की कगार पर है। इस नन्हें से परिंदे को बचाने के लिए पिछले 11 सालों से प्रत्येक 20 मार्च को विश्व गौरैया दिवस के रूप में हम मनाते आ रहे है ताकि लोग इस नहीं जी चिड़िया के संकारक्षण के प्रति जागरूक हो सके। भारत में गौरैया की संख्या लगातार घट रही है। कुछ साल पहले आसानी से दिखने वाला यह पक्षी अब तेजी से लुप्त हो रहा है। दिल्ली में गौरैया इतनी दुर्लभ हो गई हैं कि खोज करने से ये पक्षी नहीं मिलते हैं, इसलिए वर्ष 2012 में दिल्ली सरकार ने इसे राज्य पक्षी घोषित किया।

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विश्व गौरैया दिवस क्यों मनाया जाता है?

ये दिवस पूरी दुनिया में गौरैया पक्षी के बचाव के लिए लोगों को जागरूक करने के लिए इस दिवस को सम्पूर्ण विश्व में मनाया जाता है। घरों को अपनी ची ची से चहकने वाली गौरैया अब बिलकुल दिखाई नहीं देती है। इस छोटे आकार वाले खूबसूरत पक्षी का कभी इंसान के घरों में बसेरा हुआ करता था और बच्चे बचपन से इसे देखते हुए बड़े हुआ करते थे लेकिन अब स्थिति पूरा बदल गई है। गौरैया के अस्तित्व पर छाए संकट के बादलों ने इसकी संख्या ही काफी कम कर दी है कही-कही पर  तो अब ये अब बिलकुल ही दिखाई नहीं देती। 20 मार्च को हर साल पुरे दुनिया में गौरैया पक्षी के बचाव के लिए लोगो को जागरूक करने के मकसद से मनाया जाता है। 

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विश्व गौरैया दिवस मनाने की शुरुआत कैसे हुई?

द नेचर फॉर सोसाइटी ऑफ़ इंडियन एनवाररनमेंट के संयोजक मोहम्मद दिलावर ने गौरैया की जनसख्या में तेजी से गिरावट को देखते यह पहल शुरू की। पहला विश्व गौरैया दिवस 2010 में दुनिया के विभिन्न हिस्सों में मनाया गया। रॉयल सोसाइटी ऑफ़ लन्दन की 2018 की रिपोर्ट के अनुसार मनुष्यों और गौरैया के बिच 11000 साल पुराना सम्बन्ध है। अध्ययन में कहा गया है कि तीन अलग-अलग प्रजातियों के कुत्तों, घरेलू गौरैया और मनुष्यों में, अनुकूलन को कृषि के माध्यम से पेश किया गया था।

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भारत में गौरैया की स्तिथि

रॉयल सोसाइटी ऑफ़ द प्रोटेक्शन ऑफ़ बर्ड्स की एक सर्वेक्षण के अनुसार पिछले 40 वर्षों में बहुत सारे अन्य पक्षियों की संख्या में लगातार वृद्धि हुई है। लेकिन भारत में गौरैया की संख्या में 60% की कमी गई है। दुनिया भर में गौरैया की 26 प्रकार की प्रजातियां है जबकि उनमें से केवल 5 प्रकार की प्रजातियां भारत में पाई जाती है। जो बाकि पक्षी है उनकी जो संख्या बढ़ रही है लेकिन गौरैया की संख्या 60% कम हो गई है ये वाकई में टेंसन वाली बात है। 

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साल 2015 की पक्षी जनगणना के अनुसार, पंजाब के कुछ क्षेत्रों में लगभग 775 और लखनऊ में केवल 5692 गौरैया पायी गई थी। केरल, गुजरात और राजस्थान जैसे राज्यों में 20% तक की गिरावट देखी गई है। 2017 में, तिरुवनंतपुरम में केवल 29 गौरैया की पहचान की गई थी। भारतीय कृषि अनुसन्धान परिषद के एक सर्वेक्षण में पाया गया कि आंध्र प्रदेश में गौरैया की संख्या में 80% की कमी आई है। 

पहले ये चिड़िया जब अपने बच्चो को दाना खिलाया करती थी तो इंसानी बच्चे इसे बड़े कौतूहल भरी नजरों से देखते थे लेकिन अब तो इसके दर्शन ही मुश्किल हो गये है पहले ये चिड़िया जब अपने बच्चो को दाना खिलाया करती थी तो इंसानी बच्चे इसे बड़े कौतूहल भरी नजरों से देखते थे लेकिन अब तो इसके दर्शन ही मुश्किल हो। एक पक्षी वैज्ञानिक के अनुसार गौरैया की आबादी में 60 से 80 फीसदी तक की कमी आ गई है अगर इसके बचाव में उचित प्रयास नहीं किये गए तो हो सकता है गौरैया इतिहास का प्राणी बनकर रह जाये और भविष्य की पीढ़ियों को ये देखने के लिए न मिले। 

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गौरेया आज एक संकटग्रस्त पक्षी है जो पूरी दुनिया में दुर्लभ होता जा रहा है, दस या बीस साल पहले तक,  ये पक्षी सार्वजनिक स्थानों पर गौरैया के झुंड देखे जा रहे थे। लेकिन खुद को स्थितियों के अनुकूल बना लेने वाली ये चिडया अब भारत में ही नहीं यूरोप के कई बड़े हिस्सों में काफी कम रह गए  है। ब्रिटेन, इटली ,फ्रांस और जर्मनी जैसे देशों में इनकी संख्या जहा तेजी से गिर रही है नीदरलैंड में तो इन्हे दुर्लभ प्रजाति की श्रेणी में रखा गया है। 

गौरैया पासेराइन परिवार की सदस्य है। इनकी लम्बाई  14 से 16 सेंटीमीटर होती है तथा इनका वजन 25 से 32 ग्राम होता है। एक समय में इनमें कम से कम तीन बच्चे होते है। गौरैया अधिकार झुंड में रहती है। भोजन तलाशने के लिए गौरैया का एक झुंड अधिकतर दो मील की दूरी तय करता है। ये पक्षी कूड़े में भी अपना भोजन ढूंढ़ लेते है।

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गौरैया की घटती संख्या के कारण

गौरैया की घटती जनसंख्या के कुछ प्रमुख मुख्य कारण 

  • भोजन और जल की कमी
  • घोषलों के लिए उचित स्थानों की कमी 
  • तेजी से कटते पेड़ पौधे 
  • पहले 10-15 दिनों में, गौरैया के बच्चों का भोजन केवल कीड़े और कीड़े होते हैं, लेकिन आजकल लोग खेल से रासायनिक पदार्थों का उपयोग अपने फूलों के बर्तनों और पौधों तक करते हैं, जिसके कारण न तो पौधों को कीड़े मिलते हैं और न ही यह पक्षी। इस भोजन का उचित भोजन। इसलिए, आज गौरैया सहित हजारों पक्षी या तो विलुप्त हो चुके हैं या किसी कोने में अपनी अंतिम सांस ले रहे हैं।
  • अनाज में कीटनशको के स्तेमाल आहार की कमी और मोबाइल फोन तथा मोबाइल टावरों से निकलने वाली सूक्ष्म तरंगें गौरैया के अस्तित्व के लिए खतरा बन रही है। 
  • आज लोगों में गौरैया के बारे में जागरूकता पैदा करने की आवश्यकता है, क्योंकि कई बार लोग बसने से पहले अपने घरों में पक्षियों की घोषणाओं को नष्ट कर देते हैं।
  • कई बार बच्चे इन्हें पकड़कर पहचान के लिए इनके पैर में धागा बांधकर इन्हें छोड़ देते है इससे कई बार किसी पेड़ की टहनी या शाखाओं में अटककर इस पक्षी की जान चली जाती है। 
  • इतना ही नहीं, कई बार, बच्चे गौरैया को पकड़ते हैं और उसके पंखों को रंग देते हैं, जिससे उन्हें उड़ना मुश्किल हो जाता है और उनके स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है।
  • यहाँ तक की इन पक्षियों को वापस बुलाने के बारे में वैज्ञानिकों ने सलाह दी है कि गौरैया को फिर से बुलाने के लिए लोगों को अपने घरों में कुछ ऐसे स्थान उपलब्ध कराने चाहिए जहां वे अपने घोषले बना सके और उनके अंडे तथा बच्चे हमलावर पक्षियों से सुरक्षित रह सके। 
  • वैज्ञानिकों का मानना है कि गौरैया की आबादी घटने का यह भी एक बड़ा कारण हो सकता है, क्योंकि कई बार पक्षी जैसे कि कौए अपने अंडे और बच्चे खाते हैं क्योंकि उनके घोंसले सुरक्षित स्थानों पर नहीं होते हैं।

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पर्यावरण संतुलन में गौरैया की भूमिका

पर्यावरण संतुलन में गौरैया महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। गौरैया अपने बच्चों को अल्फ़ा और कैटवार्म नामक कीड़े खिलाती है। ये कीड़े फसलों के लिए बेहद खतरनाक होते है। ये फसलों की पत्तियों को मारकर नष्ट कर देते हैं।  इसलिए ये गौरैया बहुत ही बहुतपूर्ण थी कृषि के लिहाज से और इसके आलावा गौरैया मानसून के मौसम में दिखाई देने वाले कीड़े भी खाती है। साधारण सी में में हम ये कही की ये उन कीड़ों को खाती है जो मनुष्य की कृषि की प्रभावित करते है। इससे पर्यावरण संतुलित बना रहता है। 

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