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कैसे कंप्यूटर साक्षरता रोजगार और विकास को बढ़ावा देती है? | computer saksharta divas kab manaya jata hai

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विश्व कंप्यूटर साक्षरता दिवस (world computer literacy day) हर साल 02 दिसम्बर को मनाया जाता है । दुनिया कंप्यूटर और डिजिटल गैजेट पर काम करती है । वे जल्द ही रोजमर्रा की जिंदगी में एक जरूरी चीज बन गए है । कंप्यूटर और इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों के बारे में जागरूकता को बढ़ावा देने के लिए विश्व कंप्यूटर साक्षरता दिवस मनाया जाता है । इस दिवस में लोगो को प्राथमिक उपयोग से प्रोसेसिंग स्तर और उन्नत समस्या-समाधान से लेकर कौशल कौशल की एक श्रृंखला के साथ कुशलता से उनका उपयोग करने के लिए प्रोत्साहित करता है । यह भी पढ़ें: 👉 16 December  विजय दिवस   विश्व कंप्यूटर साक्षरता दिवस  कंप्यूटर का नाम सुनते ही हमारे दिमाग में एक मशीन की छवि बनती है जिसमे डिस्प्ले मॉनिटर है, कीबोर्ड है, माउस है और एक सीपीयू (CPU) है। जी हाँ कंप्यूटर एक मशीन ही है हमारे लिए कैलकुलेशन करने का काम करती है लेकिन जब कंप्यूटर का अविष्कार हुआ था तब कंप्यूटर देखने में ऐसा नहीं था उसका स्वरूप कुछ अलग था, मानव के लिए गणना करना शुरू से ही कठिन रहा है।  मनुष्य बिना किसी मशीन के एक सीमित स्तर तक ही गणना य...

स्वास्तिक का इतिहास और इसका उपयोग भारतीय परंपराओं में | Swastik Image Download

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Swastik Image Download   स्वास्तिक का चिन्ह किसी भी शुभ कार्य को आरंभ करने से पहले हिन्दू धर्म में स्वास्तिक का चिन्ह बनाकर उसकी पूजा करने का महत्व है। मान्यता है कि ऐसा करने से कार्य सफल होता है। स्वास्तिक के चिन्ह को मंगल प्रतीक भी माना जाता है। स्वास्तिक शब्द को ‘ सु ’ और ‘ अस्ति ’ का मिश्रण योग माना जाता है। यहां ‘ सु ’ का अर्थ है शुभ और ‘ अस्ति ’ से तात्पर्य है होना। अर्थात स्वास्तिक का मौलिक अर्थ है ‘ शुभ हो ’, ‘ कल्याण हो ’ । हिंदुत्वा । hindutva शुभ कार्य यही कारण है कि किसी भी शुभ कार्य के दौरान स्वास्तिक को पूजना अति आवश्यक माना गया है। लेकिन असल में स्वस्तिक का यह चिन्ह क्या दर्शाता है , इसके पीछे ढेरों तथ्य हैं। स्वास्तिक में चार प्रकार की रेखाएं होती हैं , जिनका आकार एक समान होता है।   Swastik Image Swastik Image Download चार रेखाएं मान्यता है कि यह रेखाएं चार दिशाओं - पूर्व , पश्चिम , उत्तर एवं दक्षिण की ओर इशारा करती हैं। लेकिन हिन्दू मान्यताओं के अनुसार यह रेखाएं चार वेदों - ऋग्वेद , यजुर्वेद , अथर्ववेद और सामवेद का प्रतीक ह...