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डॉ. राजेंद्र प्रसाद का जीवन, जयंती और पुण्यतिथि: एक प्रेरक व्यक्तित्व | Dr Rajendra Prasad Ka Jivan Parichay in Hindi

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दुनिया में मेघा प्रतिभा की तब-जब चर्चाएं आई है, देश रत्न राजेंद्र बाबू का नाम सभी ने दोहराई है । जी हाँ दोस्तों आज मै बात कर रहा हूँ प्रतिभा के धनि एवं सादा जीवन उच्च विचार के प्रति भारत के प्रथम राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद जी की । सादगी, सेवा, त्याग, देशभक्ति और स्वतंत्रता आंदोलन में अपने आप को पूरी तरह होम कर देने के गुणों को किसी एक व्यक्तित्व में देखना हो तो उसके लिए भारत के पहले राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद नाम लिया जाता है ।  महत्वमा गाँधी ने उन्हें अपने सहयोगी के रूप में चुना था ।  यह भी पढ़ें: 👉  स्वामी विवेकानंद जयंती डॉ राजेंद्र प्रसाद का जीवन परिचय डॉ राजेंद्र प्रसाद का जीवन परिचय हिंदी में (dr rajendra prasad ka jeevan parichay) भारत के प्रथम राष्ट्रपति भारत रत्न डॉ. राजेंद्र प्रसाद जी का जन्म 3 दिसंबर 1884 को बिहार के सिवान जिले के जीरादेई गांव में हुआ था । वह अत्यंत दयालु और निर्मल स्वभाव के महान व्यक्ति थे । उनके पिता महादेव सहाय फ़ारसी और संस्कृत दोनों भाषाओँ के विद्वान थे ।  यह भी पढ़ें: महावीर जयंती और जीवन इतिहास  उनकी माता कमलेश्वरी द...

लौह पुरुष सरदार वल्लभ भाई पटेल की जयंती और पुण्यतिथि कब मनाया जाता है? | sardar vallabhbhai patel ka jivan parichay

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एक ज़माने में जब भारत ब्रिटिश शासन के अधीन था । एक आम आदमी मिट्टी का बेटा आया । उसने आंदोलन की कमान संभाली और बड़े दर्द और पीड़ा के बाद दृढ़इच्छा शक्ति और निश्चय के साथ भारत को आजादी दिलाने में मदत की   एकता और अखंडता के प्रतिक  सरदार वल्लभ भाई पटेल ।   उनकी जयंती पर आधुनिक भारत के निर्माण पर  विश्वास योगदान के लिए भारत उनको शलाम करता है । इनके द्वारा किये गए साहसिक कार्यो के वजह से ही उन्हें लौह पुरुष और सरदार जैसे नामो से जाना जाता है । यह भी पढ़ें:  छत्रपति शिवाजी महाराज इतिहास, जयंती और पुण्यतिथि सरदार वल्लभभाई पटेल का जीवन परिचय (sardar vallabhbhai patel ka jivan parichay) लौह पुरुष सरदार वल्लभ भाई पटेल 1. सरदार वल्लभ भाई पटेल का जन्म कब हुआ था (sardar vallabhbhai patel ka janm kab hua tha) वल्लभ भाई पटेल का जन्म 31 अक्टूबर 1875 को गुजरात के खेड़ा जिले के नडियाद नामक कस्बे में हुआ था। तब यह ब्रिटिश इंडिया के बॉम्बे प्रेसीडेंसी में में था। उनके पिता का नाम झवेरभाई पटेल था और उनकी माँ का नाम लाडबा था। उनके चार भाई सोमाभाई पटेल, नरसीभाई पटेल, विट्टलभा...

कैसे कंप्यूटर साक्षरता रोजगार और विकास को बढ़ावा देती है? | computer saksharta divas kab manaya jata hai

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विश्व कंप्यूटर साक्षरता दिवस (world computer literacy day) हर साल 02 दिसम्बर को मनाया जाता है । दुनिया कंप्यूटर और डिजिटल गैजेट पर काम करती है । वे जल्द ही रोजमर्रा की जिंदगी में एक जरूरी चीज बन गए है । कंप्यूटर और इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों के बारे में जागरूकता को बढ़ावा देने के लिए विश्व कंप्यूटर साक्षरता दिवस मनाया जाता है । इस दिवस में लोगो को प्राथमिक उपयोग से प्रोसेसिंग स्तर और उन्नत समस्या-समाधान से लेकर कौशल कौशल की एक श्रृंखला के साथ कुशलता से उनका उपयोग करने के लिए प्रोत्साहित करता है । यह भी पढ़ें: 👉 16 December  विजय दिवस   विश्व कंप्यूटर साक्षरता दिवस  कंप्यूटर का नाम सुनते ही हमारे दिमाग में एक मशीन की छवि बनती है जिसमे डिस्प्ले मॉनिटर है, कीबोर्ड है, माउस है और एक सीपीयू (CPU) है। जी हाँ कंप्यूटर एक मशीन ही है हमारे लिए कैलकुलेशन करने का काम करती है लेकिन जब कंप्यूटर का अविष्कार हुआ था तब कंप्यूटर देखने में ऐसा नहीं था उसका स्वरूप कुछ अलग था, मानव के लिए गणना करना शुरू से ही कठिन रहा है।  मनुष्य बिना किसी मशीन के एक सीमित स्तर तक ही गणना य...

स्वास्तिक का इतिहास और इसका उपयोग भारतीय परंपराओं में | Swastik Image Download

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Swastik Image Download   स्वास्तिक का चिन्ह किसी भी शुभ कार्य को आरंभ करने से पहले हिन्दू धर्म में स्वास्तिक का चिन्ह बनाकर उसकी पूजा करने का महत्व है। मान्यता है कि ऐसा करने से कार्य सफल होता है। स्वास्तिक के चिन्ह को मंगल प्रतीक भी माना जाता है। स्वास्तिक शब्द को ‘ सु ’ और ‘ अस्ति ’ का मिश्रण योग माना जाता है। यहां ‘ सु ’ का अर्थ है शुभ और ‘ अस्ति ’ से तात्पर्य है होना। अर्थात स्वास्तिक का मौलिक अर्थ है ‘ शुभ हो ’, ‘ कल्याण हो ’ । हिंदुत्वा । hindutva शुभ कार्य यही कारण है कि किसी भी शुभ कार्य के दौरान स्वास्तिक को पूजना अति आवश्यक माना गया है। लेकिन असल में स्वस्तिक का यह चिन्ह क्या दर्शाता है , इसके पीछे ढेरों तथ्य हैं। स्वास्तिक में चार प्रकार की रेखाएं होती हैं , जिनका आकार एक समान होता है।   Swastik Image Swastik Image Download चार रेखाएं मान्यता है कि यह रेखाएं चार दिशाओं - पूर्व , पश्चिम , उत्तर एवं दक्षिण की ओर इशारा करती हैं। लेकिन हिन्दू मान्यताओं के अनुसार यह रेखाएं चार वेदों - ऋग्वेद , यजुर्वेद , अथर्ववेद और सामवेद का प्रतीक ह...