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जमशेदजी टाटा (Jamsetji Tata) जयंती और पुण्यतिथि कब है?

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जमशेदजी टाटा (Jamsetji Tata) उद्योग जगत के लिए हमेशा प्रेणना के स्रोत रहे है। उन्होंने न केवल शून्य से कारोबार की शुरुआत की, बल्कि एक औद्योगिक घराना भी स्थापित किया, जो वर्षों से व्यवसाय के साथ-साथ नैतिकता का भी ध्यान रख रहा है। अनेकों बार टाटा ग्रुप में व्यवसाय के लाभ-हानि को हुए  देश और समाज के जरूरतों को ज्यादा महत्त्व दिया। यही कारण है कि टाटा कंपनी सबसे भरोसेमंद ब्रांड बनकर उभरी और लोगों के दिलो दिमाग पर छा गई।  यह भी पढ़ें:  स्वामी महावीर जयंती और जीवन इतिहास  जमशेद जी टाटा कौन थे? और उनका जीवन परिचय Jamsetji Tata Biography in Hindi  जमशेदजी टाटा भारत के महान उद्योगपति और टाटा समूह के संस्थापक थे, जो विश्व प्रसिद्ध औद्योगिक घराने थे। उनका जन्म 3 मार्च 1839 को गुजरात के एक छोटे से शहर नवसारी में हुआ था। उनके पिता का नाम नौशेरवांजी और उनकी माता का नाम जीवन बाई टाटा था। नौशेरवानजी पारसी पुजारियों के अपने परिवार में पहले व्यवसायी थे। किस्मत उन्हें बॉम्बे ले आई, जहां उन्होंने व्यवसाय (व्यवसाय) में उद्यम किया। यह भी पढ़ें: 👉...

संकष्टी चतुर्थी 2021 में (Sankashti Chaturthi) कब है? जाने शुभ मुहूर्त, तिथि, पूजा विधि एवं इसके महत्त्व में

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भगवान गणेश जी को प्रथम पूज्य देव माना गया है, इसलिए हर शुभ कार्य करने से पहले उन्हें ही पूजा जाता है। हिन्दू पंचांग के अनुसार संकष्टी चतुर्थी का व्रत कृष्ण पक्ष चतुर्थी को रखा जाता है।  संकष्टी चतुर्थी का पर्व भगवान गणपति जी को समर्पित होता है। प्रत्येक माह में दो बार चतुर्थी तिथि पड़ता है। संकष्टी चतुर्थी   पर भगवान गणेश की पूजा-अर्चना किया जाता है मान्यता है कि संकष्टी चतुर्थी व्रत और पूजा-पाठ करने से सुख-समृद्धि, धन, ज्ञान और बुद्धि मेंवृद्धि होती है।  संकष्टी चतुर्थी का अर्थ संकट को हरने वाली चतुर्थी है।  संकष्टी चतुर्थी का व्रत रखने वाले भक्त का हर दुःख विघ्नहर्ता हर लेते है। आज हम आपको इस लेख में मार्च माह में पड़ने वाली संकष्टी चतुर्थी व्रत की सही तिथि, शुभ मुहूर्त, पूजा विधि और कुछ महाउपायों के बारे में बताएंगे।  यह भी पढ़ें:   महाशिवरात्रि शुभ मुहूर्त पूजा विधि संकष्टी चतुर्थी 2021 संकष्टी चतुर्थी का महत्त्व Sankashti Chaturthi Ka Mahatv  भगवान गणपति जी में आस्था रखने वाले लोग संकष्टी चतुर्थी के दिन...

बलिया: इस ऐतिहासिक और साहसिक कार्य के लिए डिप्टी कलेक्टर और इस मीडिया संस्थान ने इस स्कूल के प्रबंधक को सम्मानित किया, जानिए पूरा कार्यक्रम

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बलिया: इस ऐतिहासिक और साहसिक कार्य के लिए डिप्टी कलेक्टर और इस मीडिया संस्थान ने इस स्कूल के प्रबंधक को सम्मानित किया, जानिए पूरा कार्यक्रम सिकंदरपुर (बलिया, उत्तर प्रदेश)। तहसील क्षेत्र के काठघर बंशीबाजार में स्थित शिक्षा के क्षेत्र में अग्रणी शैक्षिक संस्थान। एस एस। गुरुकुल सीनियर सेकेंडरी एकेडमी द्वारा मंगलवार 16 फरवरी को शिक्षा सत्र 2019-20 के लिए सभी शुल्क माफ करने का ऐतिहासिक निर्णय लिया गया, जिससे वैश्विक कोरोना महामारी के कारण वित्तीय संकट का सामना कर रहे छात्रों, छात्रों और उनके अभिभावकों को बड़ी राहत मिली। फीस माफी की घोषणा की गई। प्रबंधक के इस फैसले के बाद एक तरफ जहां अभिभावकों को बड़ी राहत मिली वहीं विद्यालय प्रबंधन पर लगभग 34 लाख रूपये का अतिरिक्त बोझ भी आया। फीस माफी की घोषणा के बाद, स्कूल के प्रिंसिपल, जय प्रताप सिंह गुड्डू को बधाई देने के लिए व्यक्तियों और अभिभावकों को भेजने की प्रक्रिया अब तक जारी है। उस क्रम में आर। एस गुरुकुल के एकेडमी एकेडमी के मैनेजर जय प्रताप सिंह गुड्डू 24 फरवरी को उड़ान देने के फ़ैसले के फैसले से प्रभावित और अभिभूत थे, सुभाष कुमार सिंह, सब-ड...

केंद्रीय उत्पाद शुल्क दिवस (Central Excise Day) कब मनाया जाता है

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देशभर में हर साल 24 फरवरी को केंद्रीय उत्पाद शुल्क दिवस मनाया जाता है। इसी दिन 1944 में केंद्रीय उत्पाद शुल्क और नमक कानून अधिनियम बनाया गया था।  देश के औद्योगिक विकास में  केंद्रीय उत्पाद शुल्क विभाग की महत्वपूर्ण भूमिका है। इस विभाग ने करों का भुगतान आसान करने के लिए कर प्रणाली में सुधार किया और तकनीकों के प्रयोग को बढ़ाया।  यह भी पढ़ें: 👉 International Women's Day History in Hindi   केंद्रीय उत्पाद शुल्क दिवस कब मनाया जाता है?  केंद्रीय वित्त मंत्रालय के तहत भारत में हर साल 24 फरवरी को केंद्रीय उत्पाद शुल्क दिवस मनाया जाता है। केंद्रीय उत्पाद शुल्क एक अप्रत्यक्ष कर है, जो आज जनता को शायद ही पता हो। माल का उत्पादन 24 फरवरी 1944 को शुरू हुआ उत्पादन पर लगाया जाता है। इसलिए 24 फरवरी को केंद्रीय उत्पाद शुल्क दिवस के रूप में मनाया जाता है। यह भी पढ़ें: 👉  23 March 1931 Shahid Diwas केंद्रीय उत्पाद शुल्क दिवस का इतिहास देश का औद्योगिक विकास तभी संभव है जब देशवासी उत्पाद शुल्क भरते हैं इसके प्रति लोगों को जागरूक करने की जरूरत को समझते हुए ये द...

जया एकादशी (Jaya ekadashi 2021) कब है? जाने शुभ मुहूर्त, पूजा विधि और व्रत कथा बारे में

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क्या आप जानते है सरोजिनी नायडू (Sarojini Naidu) की जयंती कब है?

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जब भी भारतीय स्वतंत्रता संग्राम की प्रमुख नेत्रियों की बात होती है तो सरोजिनी नायडू का नाम अवश्य लिया जाता है। उर्दू, बांग्ला, तेलगु, इंग्लिश जैसी कई भाषाएं जानने वाली वो कवियत्री जिसके मुख से शब्द ऐसे झरते थे जैसे आकाश से मेघ। वाणी में इतना सम्मोहन था कि महात्मा गांधी ने एक पत्र में प्यार से बुलबुल कहा और सरोजिनी नायडू भारत कोकिला बन गई। सरोजनी नायडू भारत कोकिला के साथ-साथ एक क्रांतिकारी देशभक्त और कुशल राजनीतिज्ञ भी थीं। उन्होंने राजनितिक क्षितिज को विशेष आभा प्रदान की। सरोजनी नायडू उन रत्नों में से एक थीं जिन्हे गोखले और गाँधी जैसे महान  नायकों ने गड़कर महिमामण्डित किया था। यह भी पढ़ें:  स्वामी महावीर जयंती और जीवन इतिहास    सरोजनी नायडू का जीवन परिचय  सरोजनी नायडू का जन्म 13 फरवरी 1879 को हुआ था। वह अपने आठ भाई-बहनों में सबसे बड़ी थीं। सरोजनी के पिता श्री अघोरनाथ चट्टोपाध्याय अपने समय के विख्यात वैज्ञानिक तथा समाज सुधारक थे। सरोजनी नायडू को ये गुण अपने माता-पिता से मिले थे। वह प्रतिभावान विद्यार्थी थीं। वह बाल्यावस्था से ही कविता लिखने लगी थी। 13...

क्या आप जानते है स्वामी दयानन्द सरस्वती (Swami Dayanand Saraswati) जयंती कब है

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स्वामी दयानंद सरस्वती  Swami Dayanand Saraswati  अपने महान व्यक्तित्व एवं विलक्षण प्रतिभा के कारण जनमानस के हृदय में विराजमान है। स्वामी दयानंद सरस्वती उन महान सन्तों में अग्रणी हैं जिन्होंने देश में प्रचलित अंधविश्वास, रूढ़िवादिता, विभिन्न प्रकार के आडम्बरों व सभी अमानवीय आचरणों का विरोध किया। हिंदी को राष्ट्र भाषा के रूप में मान्यता देने तथा हिन्दू धर्म के उत्थान व इसके स्वाभिमान को जगाने हेतु स्वामी जी के महत्वपूर्ण योगदान के लिए भारतीय जनमानस हमेशा स्वामी जी का ऋणी रहेगा।  यह भी पढ़ें:  स्वामी महावीर जयंती और जीवन इतिहास  स्वामी दयानन्द सरस्वती का जीवन परिचय  उन्नीसवीं शताब्दी के महान समाज-सुधारकों में स्वामी दयानन्द सरस्वती का नाम अत्यंत श्रद्धा के साथ लिया जाता है। जिस समय भारत में चरों ओर पाखंड और मूर्ति-पूजा का बोल-बाला था। स्वामी जी ने इसके खिलाफ आवाज उठाई। उन्होंने भारत में फैली कुरीतियों को दूर करने के लिए 1876 में हरिद्वार के कुम्भ मेले के अवसर पर पाखण्डखंडिनी पताका फहराकर पोंगा-पंधियों को चुनौती दी। उन्हों...