वक्रतुण्ड महाकाय सूर्यकोटि समप्रभ:।
निर्विघ्नं कुरुमे देव: सर्वकार्येषु सर्वदा॥
संकष्टी चतुर्थी का मतलब होता है संकट को हरने वाली चतुर्थी हिन्दू मान्यताओ के अनुसार किसी भी शुभ कार्य को करने से पहले भगवान गणेश की पूजा की जाती है पुत्रो के दीर्घायु होने एवं सुख समृद्धि के लिए पुत्रवती महिलाओ द्वारा रखा जाने वाला व्रत गनेश चतुर्थी होता है।
जैसे की चतुर्थी तिथि भगवान गणपति को समर्पित है और भगवन शिव का आशीर्वाद भी प्राप्त है की प्रथम पूज्य देवता गणेश जी को माना जाता है किसी भी पूजा की शुरुआत में भगवान गणेश की पूजन आराधना उनका नमन करके ही हम पूजा की शुरुआत करते है और ऐसा करना भी चाहिएयदि हम गणेश भगवान की पूजा किये बिना अपनी पूजा कोई भी यज्ञ चाहे छोटी पूजा हो अथवा बड़ी पूजा हो करते है तो वह देवताओं को स्वीकार नही होती है, इस लिए भगवान गणपति का पूजन सर्वप्रथम किया जाता है ऐसा शिव का वरदान प्राप्त है।
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गणेश चतुर्थी की हार्दिक शुभकामनाएं बैनर |
Ganesh Chaturthi गणेश चतुर्थी
जैसे की चतुर्थी तिथि भगवान गणपति को समर्पित है तो वर्ष में जो चतुर्थी तिथि हर महीने पड़ती है कृष्ण पक्ष और शक्ल पक्ष में भगवान गणेश का पूजन अलग-अलग स्वरूपों में किया जात है जैसे कि करवा चौथ जो कार्तिक महीने में आता है या फिर भादो महीने में जो चौथ आता है उसपे हम जो बहुला चौथ जिसे कहते है उसमे भी भगवान गणेश का पूजन करते है उसी प्रकार जो माघ महीने की कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि होती है
उस दिन भी भगवान गणेश के भालचन्द्र स्वरूप का पूजन किया जाता है और इस दिन भगवान गणपति की विधिवत पूजन करती है महिलाए अपने पुत्र की उज्ज्वल भविष्य और दीर्घ आयु की कामना करते हुए भगवान गणपति से प्रार्थना कराती है और विभिन्न प्रकार के लड्डुओं का भोग अर्पित किया जाता है जैसे कि भगवान गणेश को लड्डुओं का भोग अति प्रिय है अपने उनके प्रतिमा में भी देखा होगा की प्रतिमा में उनके हाथ में हमेश लड्डु रहता है तो इसलिए अनेक प्रकार के लड्डू का भोग हम भगवान गणेश को समर्पित करते है
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Ganesh Chaturthi Pooja
13 जानवरी 2020 दिन सोमवार को चतुर्थी तिथि का व्रत रखना ज्याद फलदाई होगा। चतुर्थी तिथि का प्रारम्भ हो रहा है 13 जनवरी को शंध्या 5 बजकर 32 मिनट पर और चतुर्थी तिथि समाप्त हो रही है 14 जनवरी को दोपहर 2 बजकर 49 मिनट पर।
गणेश चतुर्थी पूजा विधि (Ganesh Chaturthi Pooja Vidhi)
चतुर्थी तिथि यदि हम उदया तिथि से लेते है तो हमे 14 जनवरी को प्राप्त होगी लेकिन 14 जनवरी को दिन में 2 बजकर 49 मिनट पर ही चतुर्थी तिथि समाप्त हो जायेगी और पंचमी तिथि प्रारंभ हो जायेगी इस लिए हमे 13 तारिक को ही दिन सोमवार को व्रत रखना ज्याद फलदाई होगा और संध्या के समय जैसे पूजन के बाद चन्द्र को अर्घ भी देना बहुत ही महत्वपूर्ण होता है और चन्द्र को अर्घ हम चतुर्थी तिथि में ही देते है। इस लिए इस बार 2025 में जो गणेश चतुर्थी का व्रत, उपवास, पूजन करेंगे वह 13 जनवरी को करना ज्यादा फलदाई होगा।
देवताओं के वास्तु के अनुसार गणेश देवता को दक्षिण मुखी करके बैठना चाहिए और गणेश जी का पूजन अकेले नहीं करना चाहिए क्युकी माना जाता है कि गणेश जी के पीछे दरिद्रता का वास होता है इसलिए गणेश जी का जब भी पूजन किया जाता है या तो माता लक्ष्मी के साथ किया जाता है नही तो उनके माता-पिता भगवान शिव यानी भोलेनाथ और माता पार्वती के सठ में गणेश जी का पूजन करने का विधान बताया गया है।
आप गणेश जी का पूजन कर रहे है तो ऋद्धि-सिद्धि के साथ में भी उनका पूजन किया जाता है, अकेले पूजा नहीं करते है ऐसा मान्यता हैकी गणेश जी के पीछे जो दरिद्रता का वास होता है यदि हम अकेले पूजन करते है तो दरिद्रता का पूजन उसी के साथ में हो जाता है इसलिए आप हमेशा इस बात का ध्यान रखे और गणेश जी को तुलसी कभी भी अर्पित नहीं करना चाहिए उन्होंने ऋद्धि-सिद्धि को वचन दिया था।
ganesh chaturthi kyu manate hai
1 टिप्पणियाँ
दिलचस्प लेखन, ऐसे और आर्टिकल के लिए देखे
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जय श्री राम
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