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भारत में अभियंता दिवस कब और क्यों मनाया जाता है? | Significance, Essay, Engineers Day in Hindi

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हर वर्ष 15 सितंबर को इंजीनियर दिवस मनाया जाता है। इस दिन हम विश्व में मौजूद सभी इंजीनियर को और उनके द्वारा किये गये कार्यों को याद करके उनके सम्मान के रूप में इस दिवस को मनाते है। इसके आलावा 15 सितंबर एक महापुरुष की जन्म तारीख है M. Visvesvaraya यह एक महान इंजीनियर थे । इन्होने ब्रिटिश के टाइम से लेकर स्वतंत्रता के बात तक काम किया और समय के बिच में उन्होंने कई महान उपलब्धियां भी हासिल किया। इंजीनियर दिवस  या अभियंता दिवस क्यों मनाया जाता है  सन 1955 में उन्हें भारत के महान अवार्ड भारत रत्न से सम्मानित किया गया और उन्हीं की याद में हम इंजीनियर दिवस मनाते है। मानव को आधुनिक रूप देने का काम इंजीनियर ने किया है एक समय में दूर बैठे संबंधी से बात करने के लिए हम चिठ्ठी का उपयोग करते थे। जिसमे कई दिनों से लेकर कई महीनो तक का समय लगता था लेकिन आज इंजीनियर द्वारा बनाए गए मोबाइल ने इसी महीने के समय को कुछ मिनटों का कर दिया है। ऐसे ही अनेक क्षेत्रो में मनुष्य के काम को आसान करने के लिए इंजीनियर्स अपना योगदान दे रहा है। अपने किसी नजदीकी से बात करने से लेकर आज बिल भरना, शॉपिंग...

जितिया जीवित्पुत्रिका व्रत क्यों मनाया जाता है | Jivitputrika Vrat 2022 Date, Vrat Katha in Hindi

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जितिया जीवित्पुत्रिका व्रत क्यों मनाया जाता है और इसका शुभ मुहूर्त क्या है एवं कैसे मनाया जाता है ? जीवित्पुत्रिका व्रत     हिन्दू पंचांग के अनुसार यह व्रत आश्विन माह कृष्ण सप्तमी तिथि से लेकर नवमी तिथि तक मनाया जाता है । यह पर्व तीन दिन तक चलता है । इस निर्जला व्रत को विवाहित मातायें अपनी संतान की सुरक्षा के लिए करती है । यह व्रत खास तौर से उत्तर प्रदेश, बिहार एवं नेपाल में मनाया जाता है ।  यह व्रत तीन दिन तक किया जाता है जिसमे से पहले दिन को नहाय खाय कहते है यह दिन जीवित्पुत्रिका व्रत का पहला दिन कहलाता है । इस दिन से व्रत की शुरुआत होता है इस दिन महिलाये नहाने के बाद एक बार भोजन लेती है । उसके बाद फिर दिन भर कुछ भी नहीं खाती हैं । इसके बाद दूसरा दिन खुर जुतिया कहलाता है यह जीवित्पुत्रिका का दूसरा दिन होता है । इस दिन महिलाये निर्जला व्रत करती है यह दिन बहुत ही विशेष होता है । इसके बाद अगले दिन जितिया व्रत का पारण किया जाता है । यह जीवित्पुत्रिका व्रत का अंतिम दिन होता है इस दिन कई लोग बहुत सी चीजे कहते है लेकिन खास तौर से इस दिन जोर भात, नोनी का साग एवं मड़ुआ की...

शिक्षक दिवस कब और क्यों मनाया जाता है | Teachers Day Kyu Manaya Jata Hai, Essay in Hindi

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शिक्षक दिवस कब और क्यों मनाया जाता है? | shikshak divas kyon manaya jata hai गुरु-शिष्य का रिश्ता भारतीय संस्कृति का एक महत्वपूर्ण और पवित्र हिस्सा है। जीवन में माता-पिता की जगह कोई कोई और व्यक्ति नहीं ले सकता क्योंकि वे हमें इस रंगीन दुनिया में लाते हैं। ऐसा माना जाता है कि हमारे शुरुआती जीवन के पहले शिक्षक हमारे माता-पिता ही होते हैं। भारत में गुरु और शिक्षक की परंपरा प्राचीन काल से चली आ रही है, लेकिन केवल शिक्षक ही हमें जीने का वास्तविक ढंग को सिखाते हैं। जीवन में सफल होने के लिए शिक्षा सबसे ज्यादा जरुरी है शिक्षक देश के भविष्य और युवाओं के जीवन को बनाने और उसे आकार देने के लिए सबसे महत्वपूर्ण भूमिका निभाते है। प्राचीन काल से ही गुरु का हमारे जीवन में बड़ा योगदान रहा है गुरुओं से प्राप्त ज्ञान और मार्गदर्शन से ही हम सफलता के शिखर तक पहुँच सकते है।  Teacher's Day  पूरे देश में उत्साह के साथ मनाया जाता है। इस दिन शिक्षकों को सम्मानित किया जाता है लेकिन क्या आप जानते है  Teacher's Day   5 सितम्बर को ही क्यों मनाया जाता है और किस प्रक...

165 सालो बाद पितृ पक्ष अमावस्या के अगले दिन नहीं होगा इस बार नवरात्र प्रारम्भ

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हर साल पितृ पक्ष के समाप्त होने के बाद शारदीय नवरात्रों का आरंभ भी हो जाता है ।    पितृ पक्ष की अमावस्या तिथि के अगले ही दिन प्रतिपदा तिथि के साथ माँ दुर्गा को समर्पित 9 दिनों तक चलने वाले शारदीय नवरात्रों का पर्व मनाया जाता है ।   लेकिन शास्त्रों और ज्योतिष की माने तो साल 2020 में ऐसा नहीं होगा क्योंकि ज्योतिष अनुसार इस साल करीब 1 65 सालो के बाद ऐसा अद्भुत संयोग बन रहा है जिस कारण  पितृ पक्ष और नवरात्रो के बिच 1  महीने  का अन्तर हो जायेगा।  आज हम इस लेख में साल 2020 पितृ पक्ष और नवरात्रों में बनने वाले इसी अद्भुत संयोग के बारे में बताएंगे। यह भी पढ़ें: पितृपक्ष 2020 कब से शुरू हो रहे है इस दिन क्या करना चाहिए - Pitru Paksha 2020 क्या है ये संयोग ज्योतिष के अनुसार यह  साल  लीप वर्ष होने के कारण ऐसा हो रहा है कि इस बार श्राद्ध पक्ष समाप्त होते ही अधिकमास लग जायेगा, जिस कारण ऐसे में नवरात्र और  पितृपक्ष के बीच एक महीने का अंतर आ जायेगा ।  इसके आलावा इस बार चातुर्मास जो की चार महोनो का होता है...

पितृ पक्ष श्राद्ध कब से शुरू है 2021 इस दिन क्या करना चाहिए | Pitru Paksha 2021, Vrat Katha in HIndi

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पितृपक्ष एक महत्वपूर्ण पक्ष माना गया है। शास्त्रों के अनुसार पितृ देव स्वरुप होते है ,इस पक्ष में पित्तरों  के नाम से दान, दर्पण तथा श्राद्ध जैसे कार्य किये जाते है। माना जाता है कि जो भी इन कार्यो को श्रद्धापूर्वक करता है तो उनपर पित्तरों का आशीर्वाद हमेशा बना रहता है। मान्यता है कि पितृपक्ष में किया गया श्राद्ध कर्म संसारिक जीवन को सुखमय बनाता है। हर साल Pitru Paksha -  पितृपक्ष  के बाद नवरात्री शुरू होती है।  पितृ पक्ष के इन 16 दिनों को 16 श्राद्ध भी कहते है।  धार्मिक मान्यता जो है पितृ पक्ष को लेकर इसमें ये कहा जाता है कि पूर्वजों की आत्मा की शांति और उनके तर्पण के लिए श्राद्ध किया जाता है। आज इस लेख में हम आपको श्राद्ध का अर्थ,  पितृपक्ष 2021 कब से शुरू हो रहे है और कब से कब तक है,  पित्रपक्ष 2021,  सभी महत्वपूर्ण तिथियां,  2021 में श्राद्ध कब से शुरू है,  पित्तर किसे कहते है, पितृपक्ष में क्या करना चाहिए और किन बातों को आपको विशेष ख्याल रखना चाहिए इस बारे में बताएँगे। य ह भी पढ़ें: जितिया ...

परिवर्तिनी एकादशी क्यों मनाई जाती है | Parivartini Ekadashi 2021 Date, Vrat Katha in Hindi

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पंचांग के अनुसार भाद्रपद मास के शुक्लपक्ष में आने वाली एकादशी को पद्मा एकादशी या परिवर्तिनी एकादशी के नाम से जाना जाता है। शास्त्रों में ऐसी मान्यता है की आज ही के दिन भगवान विष्णु निद्रासन से अपनी करवट बदलते है। करवट बदलने से उनके स्थान में परिवर्तन हो जाता है और इसलिए इस एकादशी को परिवर्तिनी एकादशी कहा जाता है। इस दिन भगवान विष्णु जी के वामन अवतार का पूजा किया जाता है। स्वयं भगवान श्री कृष्ण ने कहा था परिवर्तिनी एकादशी के दिन भगवान विष्णु की वामन रूप में पूजा करना चाहिए क्यूंकि भगवान इन चार महीनो में चातुर्मास में वामन रूप में ही पाताल में निवास करते है। ऐसा माना जाता है की भगवान विष्णु चातुर्मास के चार महीने सोते रहते है जो कि मास पड़ते है आषाढ़, श्रावण , भाद्रपद और आश्विन ये चातुर्मास के महीने है और ओ जागते कब है देवउठनी एकादशी के दिन माना जाता है की भगवान विष्णु जाग जाते है। परिवर्तिनी एकादशी का व्रत करने से बहुत ही ज्यादा पुण्य फल मिलता है ।  कथाओं के अनुसार जो व्यक्ति इस एकादशी का व्रत करता है भगवान विष्णु उससे अति प्रसन्न होते है और ...