गुरु तेग बहादुर शहीदी दिवस

गुरु तेग बहादुर शहीदी दिवस
धर्म, राष्ट्र, सदैव सत्य के मार्ग पर चलने वाले, मानवीय मुल्यों, आदर्शो की रक्शा के लिये अपने प्राण न्यौछावर करने वाले, मानवता के रक्षा, ,त्याग व प्रेम के प्रेणता, मानवता की भलाई के लिये भाइचारे को बढावा देवे वाले, समाज मे एकता, भेद-भाव, प्रेम, सदाचार और दया जिस धर्म में है, वही सत्य है है और संसार में आगे जीवित रहेगा,  पुरे विश्व के इतिहास में धर्म एमं सिध्दातों  की रक्षा करते हुये अपने प्राणो की आहुति देने वाले, सन 1675 में आज के ही दिन उन्होने धर्म के लिये शीश कटवा दिया लेकिन क्रुर शासकों के सामने डटे रहे, काश्मीरी पण्डितों तथा अन्य हिंदुओं को बलपुर्वक मुसलमान बनने का विरोध किया।
औरंगजेब ने कहा था - हिंदुस्तान मेंं जनेऊ नहीं पहनने दुंगा, तब उसके जबाब में गुरु तेग बहादुर जी ने कहा - मैं जनेऊ उतारने नहीं दुंगा।
इस संसार मेंं ऐसे बलिदानियों से सिखने की प्रेरणा मिलती है, जिन्होंने अपनी जान तो दे दी परंतु सत्य का त्याग नहीं किया, सिखों के नौवें गुरु गुरु तेग बहादुर जी के बलिदान दिवस पर उनके चरणों में कोटि-कोटि नमन। धर्म और मानवता की रक्षा के लियेे अपना जो बलिदान दिये है उसे युगों-युगों तक भुलाया नहीं जा सकता है।

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