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भारतीय नौसेना दिवस कब मनाया जाता है | nausena divas kab manaya jata hai

भारत में नौसेना दिवस नौसैनिक बल की शान एवं उपलब्धयों को दर्शाने के लिए मनाया जाता है इसका नेतृत्व भारत के राष्ट्रपति द्वारा भारतीय नौसेना के कमांडर इन चीफ में किया जाता है। भारतीय नौसेना भारतीय सेना का सामुद्रिक अंग है जो की 56 सौ सालो के अपने गौरवशाली इतिहास के साथ न केवल भारतीय सामुद्रिक सीमाओं अपितु भारतीय संभ्यता एवं संस्कृति की रक्षक बानी हुई है।  

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भारतीय नौसेना दिवस (Indian Navy Day) कब मनाया जाता है
भारतीय नौसेना दिवस 

देश के तीन सेनाओं में से एक नौसेना यह अपने सर्व श्रेष्ठ रूप में है जय यह दुनिया की सबसे बड़ी नौसेनाओं में शामिल है। क्या आप जानते है भारतीय नौसेना दुनिया की शीर्ष दस नौसेनाओं में से एक है और इसका स्थान 7वें नंबर पर आता है। भारतीय नौसेना के पास 67000 कर्मचारी है और 295 नाइसेना सम्पत्तियाँ है। यह दक्षिण एशिया में सबसे शक्तिशाली नौसेना मानी जाती है। 

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नौसेना दिवस क्यों मनाया जाता है 

भारत को सुरक्षा के दृष्टिकोण से देखते हुए भारतीय सेना को तीन भागों में बाटा गया है - जिसमें से एक है नौसेना। नौसेना भारत के लिए बहुत ही बहुत ही महत्वपूर्ण है सुरक्षा के लिए भी और आयात-निर्यात में भी। सन 1971 में 04 दिसंबर को भारतीय नौसेना ने पाकिस्तान के खिलाफ एक युद्ध शुरू किया था।इस अभियान में पाकिस्तान के नौसेना के मुख्यालय पर ही सबसे पहले आक्रमण किया गया था जो कराची में स्थित था

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हिंदुस्तान की इस लड़ाई में तीन विद्युत् क्लास मिसाइल बोट, दो एंटी सबमरीन और एक टैंकर शामिल किया गया था। भारत के सैनिको ने कराची में रात को आक्रमण करने की योजना बनाई थी जिससे पाकिस्तान को हराया जा सके क्युकी पाकिस्तान के पास ऐसा कोई मिसाइल और हथियार नहीं था जिससे रात में लड़ाई की जा सके इसलिए इस युद्ध में भारत का कोई भी सैनिक शहीद नहीं हुआ था।

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इस युद्ध में पहली बार जहाज पर मार करने वाली एंटीशिफ्ट मिसाइल से हमला किया गया था। इसीलिए इस दिन नौसेना के वीर जांबाजो को याद किया जाता है। इस हमले में पाकिस्तान के कई जहाजों को नष्ट किया गया था और इस दौरान पाकिस्तान के कई आयल टैंकर भी तबाह हो गए थे। भारतीय नौसेना के जबाजो ने बहुत ही बहादुरी का परिचय दिया था।

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परन्तु पाकिस्तान के 500 सैनिक मारे गए थे और 700 से अधिक सैनिक घायल हुए थे। इस युद्ध में भारत का कोई नुकसान नहीं हुआ था इसलिए यह अभियान द्रितीय विश्व युद्ध के बाद नौसेना इतिहास में सबसे सफल युद्ध माना जाता है जिसमें हिंदुस्तान को जीत प्राप्त हुआ था। इसी जीत की कामयाबी पर हर साल 04 दिसंबर को नौसेना दिवस मनाया जाता है।

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स्वतंत्रता से पहले भारत की नौसेना ना मात्र की थी विभाजन के समय शर्त अनुसार लगभग एक तिहाई सेना पाकिस्तान चली गई । जिससे कुछ अतिमहत्वपूर्ण नौसैनिक पाकिस्तान के हो गए यह देखकर भारत सरकार ने नौसेना की विस्तार की योजना बनाई एक साल बिताने के बाद ग्रेन ब्रिटेन से सात हजार तीस टन का क्रूजर दिल्ली ख़रीदा इसके बाद ध्वंसक, राजपूत, राणा, रणजीत, गोदावरी, गंगा और गोमती  ख़रीदे गए। इसके बाह आठ हजार टन का क्रूजर ख़रीदा गया इसका नामकरण मैसूर हुआ। आज भारतीय नौसेना के पास बड़ी संख्या में युद्धपोत और अन्य जहाज है जीने से अधिकतर स्वदेशी है 

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नौसेना दिवस कब मनाया जाता है (nausena divas kab manaya jata hai)

नौसेना दिवस हर साल 4 दिसंबर को मनाया जाता है।

यह दिन 1971 के भारत-पाकिस्तान युद्ध के दौरान भारतीय नौसेना के ऑपरेशन ट्राइडेंट की सफलता की याद में मनाया जाता है। इस अभियान में भारतीय नौसेना ने पहली बार पाकिस्तान के कराची बंदरगाह पर हमला करके बड़ी जीत हासिल की थी। यह दिन भारतीय नौसेना के शौर्य, बलिदान और देश की सुरक्षा में उनके योगदान को सम्मानित करने के लिए समर्पित है।

भारत में नौसेना दिवस कैसे बनाया जाता है? 

नौसेना दिवस भव्य रूप से काफी दिनों तक मनाया जाता है। इस दिवस को मानाने की योजना नौसेना कमांड द्वारा विशाखापट्टनम में मुख्य रूप से किया जाता है। भारतीय नौसेना के पश्चिमी नौसेना कमांड जिसका मुंबई में हेड ऑफिस है, अपने जहाजों और नाविकों को बहुत ही प्रभावशाली दाल के माध्यम से अपने बहादुरी और गर्व को प्रदर्शित करते है।

यह समारोह RK Beach में स्थित युद्ध स्मारक में पुष्पांजली देने के साथ शुरू होता है। युद्ध में हुए शहीदों का सम्मान करने के बाद  पनडुब्बियों, विमानों और जहाजों का एक परिचालन प्रदर्शन सैनिको द्वारा किया जाता है। इस तरह न केवल अपने उपकरण और इसकी क्षमताओं को प्रदर्शित करते है बल्कि उनकी संसाधनशीलता और तीव्रता को भी प्रदर्शित करते है। नेवी बॉल, नेवी क्वीन और नेवी फेस्ट जैसी प्रतियोगिताएं को भी आयोजित किया जाता है।

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भारतीय नौसेना दिवस हर साल 4 दिसंबर को मनाया जाता है।

यह दिन भारतीय नौसेना के 1971 के भारत-पाकिस्तान युद्ध में ऑपरेशन ट्राइडेंट की सफलता की याद में मनाया जाता है। इस अभियान में भारतीय नौसेना ने पाकिस्तान के कराची बंदरगाह पर हमला करके एक ऐतिहासिक जीत दर्ज की थी। इस दिन नौसेना के शौर्य, समर्पण और देश की सुरक्षा में उनके महत्वपूर्ण योगदान का सम्मान किया जाता है।

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भारतीय नौसेना का गठन 

भारतीय नौसेना की शुरुआत 17 वीं शताब्दी में हुआ था। जब ईस्ट इंडिया कंपनी ने एक समुद्री दल का गठन किया और ईस्ट इण्डिया कंपनी के नाम से स्थापना किया। यह दल द ऑनर एबल ईस्ट इण्डिया कंपनी मरीन कहा जाता था बाद में इसी को बदलकर  द बॉम्बे मरीन कहा गया। 

भारत के पहले विश्व समय नौसेना का नाम रॉयल इंडियन मरीन रख दिया गया था। 26 जनवरी 1950 में जब भारत पूरी तरह से गणतत्र देश बना तभी भारतीय नौसेना ने अपना नाम रॉयल इंडियन मरीन से रॉयल हटा दिया।

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भारतीय नौसेना में 32 नौ परिवहन जल जहाज और लगभग 11000 अधिकारी और नौसैनिक थे। 1971 में भारत पाकिस्तान युद्ध के दौरान भारतीय नौसेना ने ऑपरेशन ट्राइडेंट चलाकर पाकिस्तान के कराची हर्बर को मिटा दिया था जो पाकिस्तान नौसेना का मुख्यालय था। 

ऐसे में भारतीय नौसेना के खतरनाक हमले से पाकिस्तान की नौसेना कंज़ोर पड़ गयी थी और हर गई थी। भारतीय नौसेना ने जल सीमा में, कई बड़े कार्यो में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है सन 1961 में भारतीय नौसेना ने गोवा से पुर्तगालियों को भगाने में थल सेना की सहायता की थी।

भारतीय नौसेना की स्थापना कब हुई

भारतीय नौसेना की स्थापना 26 जनवरी 1950 को हुई थी, जब इसे आधिकारिक रूप से "रॉयल इंडियन नेवी" से बदलकर "भारतीय नौसेना" नाम दिया गया। हालांकि, भारतीय नौसेना का इतिहास इससे भी पुराना है।

आधुनिक भारतीय नौसेना की शुरुआत 1612 में हुई मानी जाती है, जब ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी ने समुद्री व्यापार की रक्षा के लिए अपनी नौसैनिक सेना का गठन किया। इसे 1830 में "बॉम्बे मरीन" और बाद में "रॉयल इंडियन नेवी" का नाम दिया गया। स्वतंत्रता के बाद, 1950 में भारत गणराज्य बनने के साथ इसे भारतीय नौसेना कहा गया।

आज, भारतीय नौसेना भारत की समुद्री सीमाओं की रक्षा करने और अंतरराष्ट्रीय शांति एवं सुरक्षा में योगदान देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।

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Navy Day हर साल 4 दिसंबर को मनाया जाता है। यह दिन 1971 के भारत-पाकिस्तान युद्ध के दौरान भारतीय नौसेना के ऑपरेशन ट्राइडेंट की सफलता की याद में मनाया जाता है। इस अभियान में भारतीय नौसेना ने पाकिस्तान के कराची बंदरगाह पर हमला कर ऐतिहासिक जीत दर्ज की थी। इस दिन भारतीय नौसेना के साहस, बलिदान और देश की सुरक्षा में उनके योगदान को सम्मानित किया जाता है।


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भारतीय नौसेना का मुख्यालय 

भारतीय नौसेना का मुख्यालय नई दिल्ली में स्थापित किया गया है जिसका नियंत्रण मुख्य नौसेना ऑफिसर एडमिरल के हाथो में होता है। नौसेना भारतीय सेना का एक सामुद्रिक भाग है जिसका नियंत्रण गृह मंत्रायल  होता है। 

द्रितीय विश्व युद्ध के समय नौसेना का विस्तार हुआ था अधिकारी और सैनिको की संख्या लगभग 30000 हो गई थी। भातीय नौसेना तीन क्षेत्रों में तैनात रहती है - पूर्व में विशाखापट्टनम, पश्चिमी मुंबई, और दक्षिण में कोच्चि। जिसका नियंत्रण एक फ्लैग अधिकारी द्वारा किया जाता है।

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देश को ताकतवर बनाने में भारतीय नौसेना का बहुत बड़ा योगदान रहा है। 4 दिसंबर को नौसेना दिवस के रूप में बनाते है क्योकि इस दिन भारतीय नौसेना पाकिस्तान के नौसेना पर भारी पड़ गया। इस समय भारतीय नौसेना दुनिया की पांचवी सबसे बड़ी सेना के रूप में माना जाता है, वर्तमान में भारतीय नौसेना के पास 78000 से अधिक सैनिक है।

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भारतीय नौसेना दिवस समारोह (Indian Navy Day Celebrations)

भारतीय नौसेना समारोह का आयोजन पूर्वी भारतीय नौसेना कमांड द्वारा विशाखापट्टनम में किया जाता है, भारतीय नौसेना दिवस के दिन शहीद हुए सैनिकों के याद में पुष्प चक्र अर्पित करते है। उसके बाद पनडुब्बी जहाज एवं पोत का प्रदर्शन भी किया जाता है जिसको देखने के लिए भारी संख्या में स्थानीय लोग शामिल होते है।

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भारतीय नौसेना के पास लड़ाकू हथियार कितने है 

  • जहाज - 295 
  • विमान वाहक पोत - 3 
  • युद्धपोत - 4 
  • विध्वंसक - 11 
  • लड़ाकू जलतोप - 23 
  • पनडुब्बी - 15 
  • पेट्रोल क्राफ्ट - 139 
  • युद्धपोत जहाज - 61 

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भारतीय नौसेना के पोत के नाम 

  • विमान वाहक - विक्रमदित्य. विराट।
  • विनाशक - दिल्ली श्रेणी, राजपूत श्रेणी, कोलकाता श्रेणी।
  • फ्रिगेट - शिवालिक श्रेणी।
  • ब्रह्मपुत्र श्रेणी - ब्रह्मपुत्र, व्यास, बेतवा।
  • गोदावरी श्रेणी - गोदावरी, गोमती, गंगा।
  • कार्बेट - वीर श्रेणी - वीर, निर्भीक, निपट, निरघाट, विभूति, विपुल, विनाश, विद्युत्, नाशक, प्रलय, प्रबल।
  • अभय श्रेणी - अभय, अजय, अक्षय, अग्रय।
  • पनडुब्बी - शिशुमार श्रेणी - शिशुमार, शंकुश,संकुल।
  • परमाणु पनडुब्बी - अकुल श्रेणी - चक्र, अरिहंत।
  • उभयचर युद्धपोत - मगर श्रेणी - मगर, घड़ियाल, एरावत।
  • कुम्भीर श्रेणी - चिता, महिष, गुलदार, कुम्भीर।
  • गस्त यान - सुकन्या श्रेणी - सुकन्या, सुभद्रा, सावित्री, सुजाता, सरयू, सुवर्णा, शारदा, सुमेघा, सुनैना।
  • अन्य पोत - टैंकर - दीपक, ज्योति, आदित्य, तारपीडो रिकवरी पोत, मातंग, गज, निरीक्षक।

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भारतीय नौसेना के पद कौन-कौन होते है?

  • भारतीय नौसेना के मुख्य पद....... 
  • एडमिरल ऑफ़ द फ्लीट 
  • एडमिरल 
  • वाइस एडमिरल 
  • रियल एडमिरल 
  • कमोडोर 
  • कैप्टन 
  • कमांडर 
  • लेफ्टिनेंट कमांडर 
  • लेफ्टिनेंट 
  • सब लेफ्टिनेंट 

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नौसेना का नीति आदर्श वाक्य 

शं नो वरुणः इसका अर्थ है कि जल के देवता वरुण हमारे लिए मंगल कारी रहे। स्वतंत्रता के बाद से ही नौसेना की शक्तियों  का लगातार विकास  होता रहा है आज हमारे युद्धपोत और मिसाइल समुद्र के ऊपर और समुद्रीय सतह पर पक्ष को भेद सकती है नौसेना ना केवल तटों को रक्षा बल्कि नई तकनीक तैयार और बड़ी से बड़ी आपदा के समय राहत कार्यो को करने में भी सदैव आगे रहती है।

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भारतीय नौसेना दिवस हर साल 4 दिसंबर को मनाया जाता है।

यह दिन 1971 के भारत-पाकिस्तान युद्ध के दौरान भारतीय नौसेना के ऑपरेशन ट्राइडेंट की सफलता की स्मृति में मनाया जाता है। इस अभियान में भारतीय नौसेना ने पाकिस्तान के कराची बंदरगाह पर हमला कर बड़ी विजय हासिल की थी। यह भारतीय सैन्य इतिहास में एक ऐतिहासिक क्षण था, क्योंकि पहली बार किसी ऑपरेशन में एंटी-शिप मिसाइलों का उपयोग किया गया था।

नौसेना दिवस का उद्देश्य भारतीय नौसेना के साहस, बलिदान और देश की सुरक्षा में उनके योगदान को सम्मानित करना है। इस दिन विभिन्न कार्यक्रम, प्रदर्शनियां और परेड आयोजित की जाती हैं, जिनमें भारतीय नौसेना की उपलब्धियों और क्षमता को प्रदर्शित किया जाता है।

भारतीय नौसेना के कार्य

भारतीय नौसेना (Indian Navy) देश की समुद्री सीमाओं की रक्षा करने और राष्ट्रीय सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए एक प्रमुख रक्षा बल है। इसके कार्य निम्नलिखित हैं:

1. राष्ट्रीय समुद्री सुरक्षा

  • देश की समुद्री सीमाओं की सुरक्षा सुनिश्चित करना।
  • समुद्र में घुसपैठ, आतंकवाद, और समुद्री डकैती जैसी गतिविधियों को रोकना।
  • आर्थिक समुद्री क्षेत्र (Exclusive Economic Zone - EEZ) की रक्षा करना।

2. युद्ध के समय भूमिका

  • शत्रु के समुद्री मार्गों को बाधित करना।
  • जल, थल और वायु सेना के साथ समन्वय कर ऑपरेशनों को अंजाम देना।
  • शत्रु की नौसेना को कमजोर करना और अपने हितों की रक्षा करना।

3. मानवीय सहायता और आपदा प्रबंधन (HADR)

  • प्राकृतिक आपदाओं जैसे तूफान, सुनामी, और बाढ़ के समय राहत सामग्री और सहायता पहुंचाना।
  • समुद्र में फंसे लोगों को बचाना।
  • वैश्विक स्तर पर जरूरतमंद देशों को सहायता प्रदान करना।

4. समुद्री व्यापार और अर्थव्यवस्था की सुरक्षा

  • भारतीय समुद्री व्यापारिक मार्गों की सुरक्षा करना।
  • समुद्री डकैती और अवैध व्यापार पर निगरानी रखना।

5. वैश्विक शांति और सहयोग

  • संयुक्त राष्ट्र शांति अभियानों में भाग लेना।
  • मित्र देशों के साथ नौसेना अभ्यास और संयुक्त मिशन करना।
  • अंतर्राष्ट्रीय जलमार्गों में शांति बनाए रखना।

6. तकनीकी और रणनीतिक विकास

  • नई तकनीकों का उपयोग कर अपनी ताकत को बढ़ाना।
  • आधुनिक उपकरण और जहाज विकसित करना।

7. अन्य कार्य

  • सामरिक परमाणु संपत्ति की सुरक्षा।
  • गश्त और निगरानी के माध्यम से समुद्री खुफिया जानकारी जुटाना।
  • भारतीय प्रवासियों और नागरिकों को विदेशों से संकट के समय निकालना।

भारतीय नौसेना का आदर्श वाक्य "शं नो वरुणः" है, जिसका अर्थ है "वरुण देव हमारी रक्षा करें।" यह भारतीय जलक्षेत्र की सुरक्षा और वैश्विक शांति में इसकी महत्वपूर्ण भूमिका को दर्शाता है।

भारतीय नौसेना दिवस की स्थापना किसने की

भारतीय नौसेना दिवस की स्थापना किसी एक व्यक्ति विशेष द्वारा नहीं की गई, बल्कि यह 4 दिसंबर 1971 को हुए ऑपरेशन ट्राइडेंट की सफलता की याद में भारतीय नौसेना और भारत सरकार द्वारा चिह्नित किया गया।

ऑपरेशन ट्राइडेंट के दौरान भारतीय नौसेना ने पाकिस्तान के कराची बंदरगाह पर ऐतिहासिक हमला किया, जिसमें भारी सफलता हासिल हुई और पाकिस्तान की नौसेना को बड़ा नुकसान हुआ। इस जीत के उपलक्ष्य में हर साल 4 दिसंबर को भारतीय नौसेना दिवस मनाने की परंपरा शुरू हुई।

इस दिन को आधिकारिक तौर पर भारतीय नौसेना के वीरता, बलिदान और योगदान को सम्मानित करने के लिए चिह्नित किया गया, और इसे भारतीय नौसेना तथा रक्षा मंत्रालय द्वारा मान्यता दी गई।

नौसेना दिवस का महत्व

1971 के युद्ध में भारतीय नौसेना ने पाकिस्तान के कराची बंदरगाह पर हमला कर उसे भारी नुकसान पहुंचाया था। इस ऑपरेशन को ऑपरेशन ट्राइडेंट कहा गया। यह पहली बार था जब भारतीय नौसेना ने युद्ध में एंटी-शिप मिसाइलों का उपयोग किया और पाकिस्तान की नौसेना को कराची में गहरे नुकसान का सामना करना पड़ा।

स्थापना का संदर्भ

नौसेना दिवस की स्थापना भारतीय नौसेना के बहादुरी और योगदान को सम्मानित करने के लिए की गई थी। इसकी शुरुआत 4 दिसंबर 1971 को ऑपरेशन ट्राइडेंट की सफलता के बाद हुई। इसका उद्देश्य न केवल नौसेना के शौर्य को याद करना है, बल्कि देशवासियों को भारतीय नौसेना की महत्वपूर्ण भूमिका के बारे में जागरूक करना भी है।

मुख्य आयोजक

भारतीय नौसेना खुद इस दिन को आयोजित करती है, जिसमें विभिन्न कार्यक्रम, परेड, युद्धपोतों का प्रदर्शन, और युद्ध अभ्यास शामिल होते हैं।

भारतीय नौसेना के कितने कमांड है

भारतीय नौसेना के कुल तीन मुख्य कमांड (Commands) हैं। प्रत्येक कमांड का नेतृत्व एक फ्लैग ऑफिसर कमांडिंग-इन-चीफ (FOC-in-C) द्वारा किया जाता है, जो वाइस एडमिरल के पद पर होता है। ये कमांड हैं:

1. पश्चिमी नौसेना कमांड (Western Naval Command)

  • मुख्यालय: मुंबई, महाराष्ट्र
  • जिम्मेदारी: अरब सागर और पश्चिमी समुद्री सीमाओं की रक्षा।
  • यह भारतीय नौसेना का सबसे महत्वपूर्ण और शक्तिशाली कमांड है।

2. पूर्वी नौसेना कमांड (Eastern Naval Command)

  • मुख्यालय: विशाखापट्टनम, आंध्र प्रदेश
  • जिम्मेदारी: बंगाल की खाड़ी और पूर्वी समुद्री सीमाओं की सुरक्षा।
  • यह कमांड भारतीय नौसेना के रणनीतिक और संचालनात्मक अभियानों में अहम भूमिका निभाता है।

3. दक्षिणी नौसेना कमांड (Southern Naval Command)

  • मुख्यालय: कोच्चि, केरल
  • जिम्मेदारी: प्रशिक्षण और शैक्षणिक गतिविधियां।
  • यह कमांड मुख्य रूप से नौसेना कर्मियों के प्रशिक्षण और अनुसंधान पर केंद्रित है।

इन कमांड्स के अतिरिक्त:

  • अंडमान और निकोबार कमांड (Andaman and Nicobar Command)
  • यह भारतीय सशस्त्र बलों का एकमात्र थिएटर कमांड है, जिसमें नौसेना, वायुसेना, थलसेना और तटरक्षक बल शामिल हैं।
  • इसका मुख्यालय पोर्ट ब्लेयर में है।
  • इसे सामरिक दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है।

इन कमांड्स के माध्यम से भारतीय नौसेना समुद्री क्षेत्र की सुरक्षा और संचालन सुनिश्चित करती है।

भारतीय नौसेना के प्रमुख कौन है

वर्तमान में भारतीय नौसेना के प्रमुख एडमिरल दिनेश कुमार त्रिपाठी हैं। उन्होंने 30 अप्रैल 2024 को भारतीय नौसेना के 26वें प्रमुख के रूप में अपना कार्यभार संभाला। एडमिरल त्रिपाठी इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर और संचार के विशेषज्ञ हैं, और उनके पास नौसेना में लगभग 39 वर्षों का अनुभव है। उन्होंने एडमिरल आर. हरि कुमार का स्थान लिया है।

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